"है खामोश मेरी हर सुबह, है तन्हा मेरी हर रात, तू आ आकर मेरे हर पल को, महफ़िल कर दे। था काला मेरा हर कल, है अँधेरा मेरा हर आज, तू आ आकर मेरी ज़िंदगी को, रोशन कर दे। तड़प रही है रूह मेरी, जल रहा रोम-रोम, तू आ आकर इस दिल पर, मरहम कर दे।"
जब कभी तन्हाई मुझे घेर लेती हे, तेरी यादें मुझे अपने आगोश में समेट लेती हे, भूल जाता हूँ में खुद को भी उन पलों, परछाई भी फिर मुझे अपनी, पराई सी लगती हे |
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें